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Category: Politics

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ओमर अबदुल्लाह का ट्वीट, राजनाथ, युद्ध का झुनझुना और वैग द डॉग

कभी-कभी लगता है कि हॉलिवुडिया कथाकार त्रिकाल दर्शी होते हैं। मतलब संजय दृष्टि से दो पैकेज एक्स्ट्रा। संजय का तो सिर्फ़ एक पैकेज था, वर्तमान का, उसमें भी चैनल ख़ाली कुरूक्षेत्र का था। पर...

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इस हफ़्ते हम किसका बायकॉट करने वाले हैं ?

बचपन से ही मैं चाहता था कि मैं बायकॉट करूं। बहुत दिन ललक थी। पर एक्प्रेस नहीं कर पा रहा था। परिस्थितियां मेरी इस इच्छा को चारों ओर से कूट रही थीं, जैसे अनजान...

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केंद्रीय विद्यालय के सिलेबस में अगड़ों-पिछड़ों पर चैप्टर किसने डाला ?

मैं उस केंद्रीय विद्यालय को भी नहीं पहचान पाया जिसका वीडियो थोड़े दिनों पहले देखा। बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर से आया था ये वीडियो जिसमें कुछ छात्र एक छात्र को पीट रहे थे। स्कूलों में...

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एकांकी : ये कैसा यज्ञ, ये कैसी आहुति जजमान । 

सबकी आँख पनियाई हुई है। सब ढों-ढों करके खांस रहे हैं। तीन-चार निपट लिए हैं, फर्श पर लोट रहे हैं। महिलाएं साड़ी से मुँह ढंक कर आँख मूंद कर बैठ गई हैं। पुरुषों के...

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हिपोक्रेसी डेमोक्रेसी – प्रदर्शनीय और दर्शनीय

 एक लाइन बार बार सुनते थे कि गुरू और अभिभावक जो कहें वो करो, जो करें वो मत करो। दरअसल हिप्पोक्रैसी हमारी डेमोक्रेसी का हिप्पोपोटोमस है, दर्शनीय और संग्रहणीय है। एक आदर्श, आदरणीय और...

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हे प्रभु, बुलेट ट्रेन पर आशंका बढ़ती जा रही है…

भारत जैसे पाखंडी देश में किसी भी मुद्दे पर शोध करना, जानकारी इकट्ठा करना, संवाद करके, अलग-अलग विचारों को सुनना, अपनी धारणा बनाना किसी को भी फ़्रॉयड या चंकी पांडे बना सकता है। और...

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देशभक्ति, एटीएम, नोटबंदी, सोशल मीडिया और फ़ुटबॉल में लुधकने का महात्म

स्कूल में खेले जाने वाले फ़ुटबॉल की याद आ रही थी। ये आमतौर पर ज़्यादा होने लगा है आजकल, कि तजुर्बे या उदाहरण से कूद कूद कर एक्सप्रेशन में आ रहे हैं। जिसके पीछे...

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हमारे नेता वैसे ही होते हैं जैसे हम होते हैं । 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ग़लती ये नहीं थी कि वो पुलिसकर्मियों की गोद में बैठकर बाढ़ प्रभावित इलाक़े का दौरा करने के लिए गए थे, जिस प्रकरण ने सोशल मीडिया को व्यंग्य की...

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क्या रोहित वेमुला देख चुका था कि अंत में डेथ सर्टिफ़िकेट बनाम कास्ट सर्टिफ़िकेट होगा ?

कोई भी विचार या मूल्य जब सार्वजनिक होता है तो फिर ये स्वीकार करना ही होता है कि उसका रूप-स्वरूप क्या रहेगा, क्या जाएगा, जड़ बचेगी या शाख़, अंत बदलेगा या प्रारंभ, ये निर्णय...

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जुमला शाश्वत है। उसका ना ओर है । ना अंत। 

जुमला शाश्वत है। ना उसका ओर है ना अंत। ना वो दिखाई देता है ना सुनाई देता है, उसे सिर्फ़ महसूस किया जा सकता है, तेज़ गति से आता है और कान में वैक्यूम...

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