googlee02265c5a6f1a7c2.html

Category: travel

1

अज़ान और भगवती जागरण वाली बहस के बीच लाउडस्पीकर की रणभूमि बना मेरा गाँव

अज़ान और भगवती जागरण वाली बहस के बीच लाउडस्पीकर की रणभूमि बना मेरा गाँव जो तस्वीर मैंने अभी सबसे पहले लगाई है, उसे देखकर कैसी छवि आपके दिमाग़ में आ रही है ? आम...

0

फ़ेसबुक की दुनिया में सड़कों पर दोस्त बनाता एक बाइकर

हाल फ़िलहाल में बहुत कम ऐसे लोग मिलते हैं जिन्हें देखते ही पहली नज़र में महसूस होता है कि वो इन्सपिरेशनल हैं, जिनकी कहानी प्रेरणा दे। ऐसा नहीं कह रहा कि ऐसे लोगों की...

0

कई साल बाद जब मैं गाँव गया …पार्ट -२

“बड़ों को संदेश देती मधुबनी की सातवीं क्लास की कवयित्री” कई बार कविता के बोल मज़बूत होते हैं और कविता पढ़ने का तरीक़ा भी। पर कई बार बोल दृढ़ होते हैं पर पढ़ने का...

2

वैलेंटाइन या नो वैलेंटाइन- राइड ऑन !!

हर साल की बहस होती है सोशल मीडिया पर, वैलेंटाइन या नो वैलेंटाइन। पर असल में क्या उस बहस की ज़रूरत है ? ख़ैर इस तरह की बहस में फंसने से अच्छा है …राइड पर...

0

लेह जा रहे हैं क्या ? मैं भी गया था। 

पहले की तस्वीरें युग-युगांतर की मानी जाती थीं, या कमसेकम दिखती थीं, मोटे मोटे बख़्तरबंद एलबम में। आजकल होता ये है कि एक तस्वीर की उम्र दो से ढाई घंटे रह जाती है, मतलब...

0

लेह यात्रा पार्ट 2: खारदुंग-ला सबसे ऊँचा ?

( * शुरू में ही बता दूं कि हो सकता है आगे लिखी बातों के बारे में आपको पहले से जानकारी हो, लेकिन मुझे पता नहीं था। कभी ध्यान नहीं दिया था। वैसे जो हालत खार्दुंग...

0

लेह यात्रा पार्ट 3: एसयूवी वाला साधु !

( सबसे पहले ज़ेहन में एक शीर्षक आया “द मौंक हू ड्रोव हिज़ एक्सयूवी – उस किताब से प्रेरित होकर जो मैंने पढ़ी नहीं लेकिन जिसका नाम काफ़ी प्रचलित है- ‘मौंक हू सोल्ड हिज़...

0

लेह जा रहे हैं क्या ? मैं भी गया था..

पहले की तस्वीरें युग-युगांतर की मानी जाती थीं, या कमसेकम दिखती थीं, मोटे मोटे बख़्तरबंद एलबम में। आजकल होता ये है कि एक तस्वीर की उम्र दो से ढाई घंटे रह जाती है, मतलब...

googlee02265c5a6f1a7c2.html
%d bloggers like this: